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•मार्च 14, 2007 • टिप्पणी करे

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दरबारे वतन में इक दिन सब जाने वाले जायेंगे;

कुछ अपनी सजा को पहुंचेंगे कुछ अपनी जज़ा ले जायेंगे |

ऐ खाकनशीनों उठ बैठो वो वक्त करीब आ पहुंचा है;

जब तख्त उछाले जायेंगे जब ताज गिराए जायेंगे ||